सच बताऊँ तो जब Vivo V60 Lite 4G (2026) पहली बार हाथ में आया, तो एक पल के लिए लगा — यह तो वही पुराना V60 Lite है जो पिछले साल आया था। बॉक्स लगभग एक जैसा, डिज़ाइन भी मिलता-जुलता। लेकिन जैसे ही फोन ऑन किया और पहला ऐप खोला, फर्क समझ आ गया।
वीवो ने इस बार चुपचाप एक बड़ा काम किया है। पुराने Snapdragon 685 की जगह नया Snapdragon 6s Gen 2 4G चिपसेट डाल दिया है। यह बदलाव कागज़ पर छोटा लगता है, लेकिन असल ज़िंदगी में इसका फर्क हर रोज़ महसूस होता है। बाकी स्पेसिफिकेशन्स ज़्यादातर वही हैं — पर जो बदला है, वह इस फोन को एक नई पहचान देता है।
पहले दिन का अनुभव — बॉक्स से निकाला तो क्या मिला?
बॉक्स खोलते ही पहली नज़र गई स्क्रीन पर। 6.77 इंच का AMOLED डिस्प्ले — इतना बड़ा और इतना चमकदार कि खुद-ब-खुद एक मुस्कान आ गई। रिज़ॉल्यूशन है 2392×1080 पिक्सल और रिफ्रेश रेट 120Hz। मतलब स्क्रॉलिंग एकदम मक्खन जैसी — उँगली चलाओ और स्क्रीन उड़ने लगती है।
पहले दिन शाम को एक घंटा YouTube देखा। आँखें थकीं नहीं, रंग जीवंत लगे, और काले रंग इतने गहरे थे कि लगा थिएटर में बैठे हैं। AMOLED का यही जादू है — LCD में यह एहसास नहीं मिलता।
अगले दिन धूप में बाहर निकला। अक्सर ऐसे वक्त फोन की स्क्रीन धुँधली हो जाती है और कुछ पढ़ा नहीं जाता। लेकिन यहाँ 1800 निट्स की पीक ब्राइटनेस ने कमाल किया। तेज़ दोपहर की धूप में भी WhatsApp मैसेज पढ़ना बिल्कुल आसान रहा। यह एक ऐसी चीज़ है जिसे लोग स्पेसिफिकेशन शीट में अनदेखा कर देते हैं, लेकिन रोज़मर्रा में यही सबसे ज़्यादा काम आती है।
इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर भी तेज़ और सटीक है। एक बार भी धोखा नहीं दिया। सुबह नींद में भी फोन पहली कोशिश में खुल गया।
परफॉर्मेंस — नया चिपसेट, रोज़ का फर्क
Snapdragon 6s Gen 2 का असर पहले दिन से दिखा। WhatsApp, Instagram, Chrome, YouTube — चारों एक साथ खुले थे, कोई हैंग नहीं, कोई झटका नहीं। पिछले जो फोन इस्तेमाल करता था उसमें इतने ऐप्स खोलने पर कभी-कभी स्क्रीन एक-दो सेकंड के लिए रुक जाती थी। यहाँ वह नौबत ही नहीं आई।
फोन में 8GB LPDDR4x रैम है। और ऊपर से 8GB Extended RAM का भी ऑप्शन है। मतलब ज़रूरत पड़ने पर फोन की स्टोरेज का एक हिस्सा रैम की तरह काम करता है। मैंने यह फीचर ऑन किया हुआ है और फर्क साफ दिखता है — 20 से ज़्यादा ऐप्स बैकग्राउंड में खुली रहती हैं और वापस जाने पर दोबारा लोड नहीं होतीं।
256GB UFS 2.2 स्टोरेज है। तीन हफ्ते में फोटो, वीडियो, ऐप्स सब मिलाकर 60GB से ज़्यादा हो गया — और अभी भी 190GB बाकी है। जिन लोगों को बार-बार “स्टोरेज फुल” की नोटिफिकेशन परेशान करती है, उनके लिए यह फोन एक राहत है।
फोन Android 15 बेस्ड Funtouch OS 15 पर चलता है। पहले Funtouch OS की शिकायत रहती थी — बहुत भारी, बहुत ऐड्स, बहुत ब्लोटवेयर। लेकिन अब वीवो ने इसे काफी साफ कर दिया है। इंटरफेस हल्का लगता है, नोटिफिकेशन्स ऑर्गेनाइज़ हैं और AI फीचर्स काम के हैं। जैसे AI स्मार्ट ट्रांसलेशन — किसी दूसरी भाषा का मैसेज आया तो फोन खुद पूछता है “ट्रांसलेट करूँ?” एक टैप में हिंदी में।
कैमरा — उम्मीद से ज़्यादा मिला, लेकिन एक कमी भी है
कैमरे को लेकर मेरी उम्मीदें ज़्यादा नहीं थीं। मिड-रेंज फोन का 50MP कैमरा मतलब अक्सर सिर्फ नंबर बड़ा होता है, फोटो औसत होती है। लेकिन यहाँ सच में हैरानी हुई।
50MP प्राइमरी कैमरे से दिन की रोशनी में खींची फोटो देखकर मन खुश हो गया। डिटेल इतनी शार्प थी कि फोटो को ज़ूम करके देखा — फिर भी टूटी नहीं। रंग नेचुरल आए, ओवरसैचुरेटेड नहीं। स्किन टोन भी सही दिखी जो कई बजट फोन्स में नहीं होती।
8MP अल्ट्रा-वाइड लेंस से एक बार किसी पार्क में पूरा ग्रुप फोटो खींचा — सब एक फ्रेम में आ गए। अकेले मेन कैमरे से यह संभव नहीं था। वाइड एंगल में थोड़ी distortion ज़रूर है किनारों पर, लेकिन वह इस रेंज में नॉर्मल है।
रात को कैमरे की परीक्षा ली। यहाँ थोड़ी निराशी हुई। बिल्कुल अँधेरे में फोटो में नॉइज़ आई। लेकिन जैसे ही Night Mode ऑन किया, फर्क साफ दिखा। Night Mode में फोन थोड़ा वक्त लेता है — 2 से 3 सेकंड — लेकिन जो फोटो आती है वह काफी बेहतर होती है।
32MP फ्रंट कैमरा इस फोन का छुपा हुआ हीरो है। पहले हफ्ते एक वीडियो कॉल में दूसरी तरफ से दोस्त ने कहा — “यार आज तू बहुत साफ दिख रहा है, नया फोन लिया क्या?” AI ब्यूटी मोड ऑन हो तो स्किन स्मूद दिखती है, ऑफ रखो तो नेचुरल। दोनों ऑप्शन अच्छे हैं। पोर्ट्रेट मोड में बैकग्राउंड ब्लर भी काफी नेचुरल लगता है।
एक कमी ज़रूर है — टेलीफोटो लेंस नहीं है। दूर की चीज़ें ज़ूम करने पर फोटो थोड़ी सॉफ्ट हो जाती है। जो लोग क्रिकेट मैच में खिलाड़ियों की क्लोज़ अप फोटो लेना चाहते हैं, उन्हें यह कमी खलेगी।
बैटरी — इस फोन का असली जादू यहाँ है
तीन हफ्ते में जो सबसे ज़्यादा इम्प्रेस किया, वह है इसकी बैटरी।
6,500mAh — यह नंबर देखकर अच्छा लगा था। लेकिन जो असल अनुभव रहा, वह उम्मीद से भी आगे था।
एक दिन सोमवार सुबह 7 बजे चार्ज पर से उठाया — 100%। फिर ऑफिस गया, रास्ते में Spotify चलाया, दिन भर WhatsApp और Emails, लंच पर Instagram, शाम को घर आकर डेढ़ घंटा Netflix, रात को थोड़ी देर गेमिंग। मंगलवार दोपहर 1 बजे बैटरी 16% पर थी।
यानी करीब 30 घंटे एक चार्ज में।
इससे पहले जो फोन इस्तेमाल करता था उसे रोज़ रात को चार्ज पर लगाना ज़रूरी था। यहाँ वह टेंशन ही खत्म हो गई। सफर पर जाते वक्त चार्जर लेकर चलने की ज़रूरत आधी हो गई।
और जब चार्ज करना पड़ा तो 90W फास्ट चार्जिंग ने चौंकाया। 0% से 75% — सिर्फ 35 मिनट में। यानी एक चाय बनाओ, पियो, और फोन आधे से ज़्यादा चार्ज। यह फीचर पहले सिर्फ 30,000 से ऊपर के फ्लैगशिप फोन्स में देखा था। यहाँ मिड-रेंज में मिल रहा है — इसके लिए वीवो को दाद देनी होगी।
कनेक्टिविटी और सिक्योरिटी
रोज़मर्रा की कनेक्टिविटी के लिए सब कुछ है — 4G, Wi-Fi, Bluetooth, GPS, OTG और USB Type-C पोर्ट। Type-C से डेटा ट्रांसफर भी तेज़ है।
इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर की बात करूँ तो यह बेहद फास्ट है। गीले हाथ से भी 3 में से 2 बार काम करता है। Face unlock भी है जो अँधेरे में थोड़ा स्लो है, लेकिन रोशनी में एकदम तेज़।
जो नहीं मिला — इमानदार बात
5G नहीं है — यह सबसे बड़ी कमी है। आज 2026 में जब 5G धीरे-धीरे भारत के छोटे शहरों में भी फैल रहा है, तब 4G-only फोन खरीदना एक सवाल खड़ा करता है। अगले 2-3 साल बाद जब 5G आम हो जाएगा, तब यह फोन उस रफ्तार के साथ नहीं चल पाएगा।
वायरलेस चार्जिंग नहीं — 90W फास्ट चार्जिंग है तो यह कमी उतनी नहीं खलती। लेकिन जिन्हें रात को बस पैड पर रखने की आदत है, उनके लिए यह मिस होगा।
कीमत अभी नहीं आई — यही सबसे बड़ा सस्पेंस है। अगर कीमत 18,000 से 22,000 के बीच रही तो यह एक शानदार डील है। अगर इससे ज़्यादा हुई तो फिर सोचना पड़ेगा।
पूरे स्पेसिफिकेशन्स — एक नज़र में
| फीचर | जानकारी |
|---|---|
| डिस्प्ले | 6.77″ FHD+ AMOLED, 120Hz, 1800 nits |
| प्रोसेसर | Snapdragon 6s Gen 2 4G |
| रैम / स्टोरेज | 8GB + 8GB Extended / 256GB UFS 2.2 |
| रियर कैमरा | 50MP + 8MP Ultra-Wide |
| फ्रंट कैमरा | 32MP |
| बैटरी | 6,500mAh + 90W Fast Charging |
| OS | Android 15 (Funtouch OS 15) |
| सिक्योरिटी | In-Display Fingerprint |
| कनेक्टिविटी | 4G, Wi-Fi, Bluetooth, GPS, USB-C |
| कीमत | जल्द आएगी |
मेरी आखिरी राय
तीन हफ्ते इस फोन के साथ बिताने के बाद एक बात तो तय है — बैटरी और चार्जिंग के मामले में इस रेंज में इस फोन का कोई जवाब नहीं।
डिस्प्ले शानदार है। कैमरा रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए बिल्कुल काफी है। परफॉर्मेंस में नया चिपसेट फर्क करता है। Funtouch OS अब पहले से काफी बेहतर है।
5G न होना एक ऐसी कमी है जो आज परेशान नहीं करती लेकिन कल कर सकती है। अगर आप 2-3 साल में फोन बदलने वाले हैं तो यह कमी उतनी बड़ी नहीं। लेकिन अगर फोन 4-5 साल चलाने का इरादा है तो एक बार सोच लें।
बाकी — अगर आप एक भरोसेमंद, लंबी बैटरी वाला, अच्छे कैमरे और शानदार डिस्प्ले वाला मिड-रेंज फोन ढूँढ रहे हैं, तो Vivo V60 Lite 4G (2026) आपकी शॉर्टलिस्ट में ज़रूर होना चाहिए।